मोगाः आए दिन कहीं न कहीं अस्पताल में आग लगने की घटनाएं सामने आती रहती हैं जिसमें सबसे पहले फायर सिस्टम पर सवाल खड़े होते है। ऐसा ही है मोगा के सरकारी अस्पताल का ऑटोमेटिक फायर सेफ्टी सिस्टम जो 6 साल पहले लाखों रुपए खर्चा करके लगाया गया था ताकि कोई हादसे के टाइम इसका इस्तेमाल किया जा सके। क्योंकि ये अस्पताल बाजार के अंदर है जिस कारण हेवी ट्रैफिक होने के कारण मरीज लेकर एंबुलेंस सही टाइम पर नहीं पहुंच पाते तो कोई आग लगने की घटना होने पर फायर ब्रिगेड की टीम कैसे टाइम पर पहुंच पाएगी। इसलिए अस्पताल में फायर सिस्टम वर्किंग में रहना बहुत जरूरी है।
6 साल से इस सिस्टम का मॉकड्रिल नहीं करवाया गया। ये सिस्टम आज सफेद हाथी की भांति बना हुआ है। हस्पताल की इमरजेंसी वार्ड से लेकर जच्चा बच्चा वार्ड तक सब जगह ये सिस्टम इंस्टाल किया गया, लेकिन इसको चलाने के लिए पाइप, नोजल, पानी ऑन करने वाले हेंडल नहीं है। हालांकि फायर सेफ्टी सिलेंडर हर जगाओ में मौजूद हैं पर उसको भी हादसे के टाइम इस्तेमाल करना हर एक का बस में नहीं होता।
एसएमओ गगनदीप सिंह ने बताया कि उनके पास आग पर काबू पाने के लिए इस फायर सिस्टम के अलावा अल्टरनेट भी है जोकि फायर सेफ्टी सिलेंडर हैं। उनका कहना है कि 6 साल पहले ऑटोमेटिक फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया गए थे पर यह सिस्टम इंस्टाल होने के बाद इसकी मोक ड्रिल नहीं हो पाई है। इसके अलावा उनका कहना है कि यहां चोर हाईडेंट पॉइंट से सामान चोरी करके ले जाते तो इसको लेकर जल्दी हाइ अथॉरिटी को लिख कर भेजेंगे ताकि जल्द से जल्द इसको वर्किंग में लाया जा सके तथा जो सामान मिसिंग है उसे दोबारा लगाया जा सके।