जालंधरः शहर में बसंत पंचमी की तैयारी लोगों ने शुरू कर दी है। आजकल जालंधर की सड़कों पर देसी धागे से बनी डोर तैयार करते हुए लोग देखे जा रहे हैं। विशेष रूप से अमृतसर के कारीगर अमृतसर में लोहड़ी के त्योहार के बाद अपने घर पर यह डोर बनाते हैं और फिर बसंत के दौरान जालंधर और फिर देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर अपनी डोर बेचते हैं।
अमृतसर के डोर कारीगर राम सिंह ने कहा कि उनका परिवार पिछले कई दशकों से इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है, लेकिन पिछले 15 वर्षों में चाइना डोर के आने के बाद व्यवसाय में काफी बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि इस कारोबार से होने वाली आय में भी काफी कमी आई है, लेकिन पिछले एक साल में चाइना डोर के प्रति लोगों का रुझान कम होने से उनके कारोबार को कुछ प्रोत्साहन जरूर मिला है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने भी चाइना डोर पर प्रतिबंध लगा दिया है जिससे लोग अब चाइना डोर छोड़ ये देसी डोर खरीद रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि धागे से बनी डोर से कोई नुकसान नहीं होता, जबकि चाइना डोर बेहद खतरनाक होती है और रसायनों से बनाई जाती है। उन्होंने लोगों से धागे वाली डोर का उपयोग करने की अपील की, जिसमें 12 धागे वाली डोर चाइना डोर से भी बेहतर है।
उधर, कारीगर से डोर खरीदने आए होशियारपुर के एक व्यापारी ने बताया कि चाइनीज डोर के आने से उनकी ग्राहकी में बड़ा फर्क आया है। उन्होंने यह भी बताया कि वे अमृतसर में डोर खरीदने गए थे, लेकिन वहां बड़ी मात्रा में चाइना डोर बिकने के कारण वे वहां से वापस आ गए। उन्होंने यह भी मांग की है कि अमृतसर प्रशासन इस खूनी डोर पर पूरी तरह से अंकुश लगाए।
वहीं डोर बनाने वाले कारीगरों ने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस खूनी डोर का प्रयोग न करें, जो पहले ही कई लोगों की मौत का कारण बन चुका है। दूसरी ओर, हमें इन कारीगरों के सामने मौजूद भयावह परिस्थितियों को बदलने में भी योगदान देना चाहिए, क्योंकि वे अपने व्यापार में घाटे का सामना कर रहे हैं।