अमृतसर: हांगकांग में आयोजित स्पेशल ओलंपिक्स ईस्ट एशिया कॉम्पिटिशन में ऑल इंडिया पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसाइटी के रमेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल्ड मेडल जीते हैं। उनकी इस उपलब्धि से पिंगलवाड़ा संस्था के साथ-साथ पंजाब और पूरे भारत का नाम रोशन हुआ है।
डबल्स और मिक्स्ड टीम में हासिल किया पहला स्थान
रमेश ने प्रतियोगिता के सिंगल्स मुकाबले में चौथा स्थान हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने डबल्स और मिक्स्ड टीम इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए।
दो गोल्ड मेडल जीतकर अमृतसर लौटने पर पिंगलवाड़ा संस्था में रमेश का जोरदार स्वागत किया गया। संस्था के पदाधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनकी इस उपलब्धि पर खुशी जताई और उन्हें बधाई दी।
बचपन में परिवार ने छोड़ दिया था
पिंगलवाड़ा संस्था की प्रमुख डॉ. इंदरजीत कौर ने बताया कि रमेश को बचपन में उनके परिवार ने छोड़ दिया था। उस समय रमेश बोल भी नहीं पाते थे। पिंगलवाड़ा संस्था ने उन्हें अपने साथ रखा और उनकी पूरी देखभाल की।
संस्था ने रमेश के पालन-पोषण से लेकर उनकी पढ़ाई, देखभाल और विशेष खेल प्रशिक्षण तक हर तरह की मदद की। लगातार मेहनत और प्रशिक्षण के कारण रमेश ने अपने बॉलिंग कौशल को बेहतर बनाया और आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर रहे हैं।
मेहनत और सही प्रशिक्षण से मिली सफलता
रमेश की सफलता यह दिखाती है कि अगर विशेष जरूरतों वाले बच्चों को सही माहौल, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले तो वे भी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। रमेश ने हांगकांग में दो गोल्ड मेडल जीतकर यह साबित किया है कि मेहनत और लगन के साथ किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।
SDM-2 ने दी रमेश को बधाई
अमृतसर के SDM-2 गुरमंदर सिंह ने भी रमेश से मुलाकात की और उनकी उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पूरे शहर और देश के लिए गर्व की बात है कि पिंगलवाड़ा में रहने वाले विशेष जरूरतों वाले बच्चे अपने हुनर के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन हमेशा पिंगलवाड़ा संस्था और वहां रहने वाले बच्चों के समर्थन में खड़ा है।
पिंगलवाड़ा संस्था की पहल की सराहना
सामाजिक कार्यकर्ता पवन शर्मा ने भी पिंगलवाड़ा संस्था के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था उन बच्चों और लोगों को सहारा देती है, जिन्हें परिवार या समाज ने किसी कारण से छोड़ दिया हो। पिंगलवाड़ा सिर्फ इन बच्चों की देखभाल ही नहीं करता, बल्कि उनके अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का मौका भी देता है।
रमेश की सफलता बनी मिसाल
रमेश की यह उपलब्धि इस बात की मिसाल है कि अगर किसी बच्चे को सही मौका, अच्छा प्रशिक्षण, लगातार मेहनत और परिवार जैसा सहयोग मिले तो वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। हांगकांग से दो गोल्ड मेडल लेकर लौटे रमेश की इस उपलब्धि से पिंगलवाड़ा संस्था में खुशी का माहौल है और उनकी सफलता दूसरे विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए भी प्रेरणा बनी है।