ऊना,सुशील पंडित: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब पारंपरिक गतिविधियों के साथ तकनीक का इस्तेमाल कर अपने कारोबार को नई दिशा देने की ओर बढ़ रही हैं। इसी कड़ी में हरोली में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को उद्यमिता विकास के साथ-साथ जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के व्यावहारिक इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया।
हरोली के कम्यूनिटी सेंटर में 25 से 27 अगस्त तक 25 महिलाओं के लिए तीन दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला उद्योग केंद्र ऊना ने एनआईटीसीओएन के सहयोग से रैंप (आए.ए.एम.पी) स्कीम के तहत किया।
सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी
प्रशिक्षक बिंदु महाजन ने महिलाओं को जिला उद्योग केंद्र की विभिन्न स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कारोबार की मार्केटिंग और ब्रांडिंग को प्रभावी बनाने का उपयोगी माध्यम बन चुका है। इसका इस्तेमाल उत्पादों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने और संभावित ग्राहकों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने, बाजार की मांग को समझने, लागत एवं मूल्य निर्धारण, वित्तीय योजना तैयार करने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, उद्यम पंजीकरण तथा डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल की व्यावहारिक जानकारी दी गई। महिलाओं को यह भी बताया गया कि अपने उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संभावित ग्राहकों तक कैसे प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
जनरेटिव एआई से तैयार किए उत्पादों के फोटो और पोस्टर
प्रशिक्षण के अंतिम दिन महिलाओं को जनरेटिव एआई का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने एआई की मदद से अपने उत्पादों की फोटो, पोस्टर, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल मार्केटिंग सामग्री तैयार करना सीखा।
प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनके उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना तथा स्वरोजगार के नए अवसरों के लिए उन्हें तैयार करना रहा।