मोहालीः शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब से गुरबाणी के लाइव प्रसारण के अधिकारों और गुरु की गोलक से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में एसजीपीसी के मुख्य सचिव द्वारा जारी प्रेस रिलीज पर प्रतिक्रिया देते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं और एसजीपीसी प्रशासन से संगत के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि 1 जुलाई 2023 को पीटीसी चैनल के साथ एसजीपीसी का इकरारनामा (अनुबंध) समाप्त हो चुका था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि पिछले तीन वर्षों से पीटीसी किस कानूनी आधार पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब से लाइव प्रसारण कर रहा है। उन्होंने एसजीपीसी द्वारा अन्य कंपनियों से प्रस्ताव मांगने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि प्रसारण अधिकारों के लिए टेंडर किस तारीख को और किन समाचार पत्रों में प्रकाशित किए गए थे तथा किन पंजाबी चैनलों को इसके लिए आमंत्रित किया गया था। जिस अशान कृति कंपनी का जिक्र 10 लाख रुपये महीना मांगने के नाम पर किया गया, उसकी पृष्ठभूमि और उसमें सुमित अन्य शर्तों की जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
वित्तीय नुकसान का मुद्दा उठाते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि लाइव प्रसारण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण किराए पर उपलब्ध हैं, जिनका सालाना खर्च लगभग 36 लाख रुपये बैठता है। दूसरी ओर एसजीपीसी ने पिछले तीन वर्षों से पीटीसी से मिलने वाला 2 करोड़ रुपये सालाना शुल्क लेना बंद कर दिया है। 36 लाख रुपये के किराए की आड़ में 2 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व छोड़ना सीधा 5 से 5.5 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान है। यदि पीटीसी को मुफ्त सेवा का अधिकार दिया जा सकता है, तो अन्य चैनलों को यह अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने कहा कि सिंह साहिबान ने लाइव प्रसारण जारी रखने का हुकूम दिया था, लेकिन पीटीसी से 2 करोड़ रुपये की राशि न लेने का कोई आदेश नहीं दिया था। उन्होंने सवाल किया कि एसजीपीसी के अपने खुद के चैनल की स्थापना के लिए अब तक क्या बजट निर्धारित किया गया है और इस संबंध में क्या प्रस्ताव पास किए गए हैं। गुरबाणी को घर घर तक पहुंचाने के लिए सभी चैनलों को सख्त नियम व शर्तों के आधार पर बिना किसी विज्ञापन और संपादन के प्रसारण का समान अधिकार मिलना चाहिए।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने 2023 की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड, उपकरणों की सूची और किराए का समझौता सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके साथ ही पीटीसी से 2 करोड़ रुपये लिए बिना सेवा जारी रखने का एग्जीक्यूटिव या जनरल हाउस का प्रस्ताव भी संगत के सामने लाने को कहा। साढ़े पांच करोड़ रुपये की वसूली के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि न्यायिक आयोग में मामला लंबित होने की बात कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। गुरु की गोलक के वित्तीय नुकसान पर संगत के मन में कई शंकाएं हैं, जिनका जवाब एसजीपीसी को तुरंत देना चाहिए।