नई दिल्लीः तिरुपति लड्डू में पशु चर्बी मामले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। दरअसल, न्यायमूर्ति बीआर गवई के नेतृत्व वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक नई पांच सदस्यीय स्वतंत्र SIT गठन करने का आदेश दिया है। यानी राज्य की एसआईटी को कोर्ट ने खत्म कर दिया। जस्टिस गवई ने आदेश देते हुए कहा,”हम यह आदेश दे रहे हैं। देवता में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए।
हम एसआईटी को निर्देश देते हैं। कोर्ट ने सीबीआई के 2 सदस्यों, एपी राज्य पुलिस के 2 सदस्यों और एफएसएसएआई (FSSAI) के एक एक्सपर्ट वाली एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रसाद में मिलावट के आरोपों से दुनिया भर के भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है। हम नहीं चाहते कि यह मामला राजनीतिक ड्रामा बन जाए। अगर स्वतंत्र संस्था मामले की जांच करेगी तो लोगों का विश्वास पैदा होगा। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने पुरानी एसआईटी पर भरोसा जताया था, लेकिन कोर्ट ने नई एसआईटी का गठन कर दिया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस गवई ने कहा कि हम नहीं चाहते कि यह राजनीतिक नाटक बने। स्टिस गवई ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि भगवान को राजनीति से दूर रखें।स्वतंत्र निकाय होगा तो आत्मविश्वास रहेगा। कल यानी बुधवार को इस मामले की सुनवाई टल गई थी। एसजी तुषार मेहता ने कहा था कि शुक्रवार को केंद्र का जवाब रखेंगे इसलिए इस मामले की सुनवाई एक दिन के टल गई थी।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा था कि क्या राज्य सरकार की एसआईटी काफी है या फिर किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच सौंपी जानी चाहिए। एसजी ने कहा कि मैंने मुद्दे पर गौर किया। एक बात साफ है कि अगर इस आरोप में सच्चाई का कोई अंश है तो यह अस्वीकार्य है। मुझे एसआईटी के सदस्यों के खिलाफ कुछ नहीं मिला।
एसजी ने कहा कि एसआईटी की निगरानी किसी वरिष्ठ केंद्रीय अधिकारी द्वारा की जाए। यह विश्वास को बढ़ाएगा। जस्टिस गवई ने कहा कि हमने अखबार में पढ़ा है कि अगर जांच कराई जाए तो मुख्यमंत्री को कोई आपत्ति नहीं है। रोहतगी ने कहा कि हम एसआईटी के साथ जाना चाहते हैं। आपकी पसंद के किसी भी अधिकारी को शामिल कर सकते हैं। सरकार ने भावनाओं को ध्यान में रखते हुए एफआईआर दर्ज की।
याचिकाकर्ता के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच हो तो यह उचित होगा। अगर उन्होंने बयान न दिया होता तो दूसरी बात होती। इसका प्रभाव पड़ता है। सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें मामले की जांच कर रही आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT के सदस्यों पर भरोसा है। SG ने कहा कि उनकी सलाह है कि SIT जांच की निगरानी केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए।