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बंगाणाः सर्पदंश से महिला की मौत

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क्या ऊना में सांप के काटने का इलाज है?
 
ऊना/ सुशील पंडित: जैसे जैसे जंगल नष्ट हो रहे हैं। जंगली जीवों के ठिकाने सिकुड़ रहे हैं वैसे वैसे सांप के काटने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस साल सर्पदंश से होने वाली मौत की घटनाओं की सूचना आने लगी है। सोमवार रात बंगाणा तहसील के जसाणा गांव में घर लौट रही एक महिला की सर्पदंश से मौत हो गई। बंगाणा अस्पताल में जब उक्त महिला को ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महिला की पहचान जसाणा पंचायत के दमोहड़ गांव की 49 वर्षीय नीलम देवी के रूप में हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना रात साढ़े नौ बजे की बताई जा रही है। महिला का पति गांव के ही मुख्यमार्ग पर रेहड़ी लगाने का काम करता है। काम समेटने के बाद जिस समय दंपति घर जा रहा था तब महिला का पैर सांप पर आ गया जिसके बाद सांप ने उसके पैर पर काट लिया। सांप इतना जहरीला था कि जब महिला को बंगाणा अस्पताल पहुंचाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इतनी अधिक मौतों का कारण क्या?

महिला की मौत के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि आखिर कुछ वर्षों से सांप के काटने से ऊना की बेशकीमती जानें जा क्यों रही हैं। अभी तो बरसात शुरू भी नहीं हुई है और सर्पदंश के मामले आने लग गए हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि लोगों द्वारा इस वर्ष अत्याधिक जंगल जलाने के बाद जंगली जीवों का इंसानी बस्ती की ओर पलायन हुआ है। साथ ही सांप और जंगली जीवों के आशियाने भी सिकुड़ रहे हैं। कम जगह पर अधिक जीवों के पहुंच जाने से भी सर्पदंश की घटनाओं में इजाफा हुआ है। बरसात के बाद इन घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि के अनुमान भी लगाए जा रहे हैं जब खेतों में किसान जहरीले कीटनाशकों के छिड़काव करेंगे। इससे पहले पंजाब और हरियाणा में भी पाया गया है कि बरसात के समय कीटनाशकों के प्रयोग से सांपों का इंसानी बस्ती की ओर पलायन होता रहा है जिससे पंजाब और हरियाणा में हिमाचल के मुकाबले अधिक सर्पदंश रिपोर्ट होते हैं।

21वीं सदी में भी सर्पदंश का इलाज दुर्लभ

सर्पदंश होने पर लोग मरीज को अस्पताल तो ले जाते हैं लेकिन अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी के चलते सर्पदंश का शिकार व्यक्ति दिमाग में ऑक्सीजन के प्रवाह की कमी से मारा जाता है। जानलेवा सापों की मुख्यतः दो किसमें ऊना में पाई जाती हैं। एक कॉमन क्रेत और दूसरा कोबरा (नाग)। इन दोनों सांपों के काटने के बाद खून में ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाती है। सांपरोधी दवा से तो खून से जहर को निकालने का काम किया जाता है लेकिन सर्पदंश का सबसे बड़ा इलाज वेंटिलेटर ही है। दिमाग पर असर करने वाला न्यूरोटॉक्सिक विष पीड़ित व्यक्ति के दिमाग से पूरे शरीर को जाने वाले संदेशों को बाधित कर देता है। इससे शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं। खासकर फेफड़े सांस लेना भूल जाते हैं।

फेफड़ों के न फूलने से शरीर के सभी अंगों को ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाती जिससे मरीज मल्टीऑर्गन फेल्योर अर्थात दो से अधिक अंदरूनी अंग खराब हो जाते हैं। कुछ समय ऑक्सीजन न मिलने से मौत का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए वेंटिलेटर और विषरोधी दवा का संयुक्त रूप से प्रयोग ही मरीज की जान बचा सकता है। वेंटिलेटर मरीज के फेफड़ों को मशीन से फुलाकर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को नियमित कर देता है और विषरोधी दवा खून से जहर को पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है। इसलिए ऊना के सभी सीएचसी अस्पतालों और क्षेत्रीय अस्पतालों में आईसीयू स्थापित करने की आवश्यक्ता आन पड़ी है। मगर किसी भी सरकारी अस्पताल में सांप के काटे का पूरा इलाज उपलब्ध नहीं है। ऊना के मरीज ऐसी स्थिति में होशियारपुर के प्राइवेट और महंगे अस्पतालों का रुख करते हैं। हैरानी की बात है कि 21वीं सदी में भी 20वीं सदी के साधारण स्वास्थ उपकरणों से हमारा जिला वंचित है।

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