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जालंधरः दीपावली पर लगी बाजार में रौनक, कुम्हारों के चेहरों पर आई मुस्कान, देखें वीडियो

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7 दिन में बनता है एक छोटा-सा दीयाः कुम्हार 

जालंधर, ENS: त्यौहारों का सीजन शुरु हो गया है।  दिवाली भी नजदीक आ रही है। दिवाली के लिए बाजार सज धज कर तैयार है। दीपावली के मौके पर बाजार में मिट्टी के दीए भी हर वैरायटी के मौजूद हैं। छोटे दिए बड़े दिए के अलावे कढ़ाई किये हुए दिए भी बाजार में मौजूद है जो अपनी खूबसूरती से लोगों को आकर्षित करती है। बाजारों में रौनक देख कुम्हारों के चेहरों पर भी मुस्कान आ गई है। वहीं दीपावली पर पारंपरिक रूप से जलने वाले मिट्टी के दिया की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। हाल के वर्षों में दीपावली का त्योहार चाइनीज सामानों से नहीं बल्कि देशी दीयों से लोगों के घर जगमग होने लगे है।

कई सालों से मिट्टी के दीयों की मांग लगातार घट रही थी, जिसके कारण कई कुम्हारों ने अपना काम छोड़ दिया और दूसरा पेशा को अपना लिया था। लेकिन अब मेक इन इंडिया के चलते लोगों का रुझान देशी सामान से दिवाली मनाने की ओर बढ़ा है। इसी के कारण अब बाजार में मिट्टी के दीयों की मांग खूब बढ़ गई है। दरअसल, दीपावली पर हमारे घरों को रोशन करने वाला दीये को बनाने के लिए कुम्हार को काफी मेहनत करनी पड़ती है। कुम्हार ने बताया कि 7 दिन की मेहनत के बाद दीया बनता है। वहीं बात करें जालंधर के सोफी गांव की तो यहां पर कुम्हार आज भी दीये बनाते हैं। उनका कहना है कि वह सिर्फ इसलिए दीये बनाते हैं ताकि परंपरा जीवित रहे।  यहां मिट्‌टी की मूर्तियां बनाने वाले कलाकार दीवाली से पहले दिन-रात मेहनत कर दीये बनाने में जुट जाते हैं।

कुम्हार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेक इन इंडिया का नारा देकर हम लोगों का कल्याण किया है। इससे उत्पादन भी बढ़ा है।इस बार दीपावली पर दीयों की मांग अच्छी रहने की संभावना है। इसी दौरान दीये की खरीद करने आए लोगों का कहना था कि आस्था के साथ बना मिट्टी के दीयों का एक अलग ही महत्व है। हाईटेक युग में एक से बढ़कर एक रंगीन बल्ब अपनी खूबसूरती की छटा बिखेर रहे होते हैं। वहीं मध्यम सा जलता हुआ मिट्टी का दीया परंपरा को जीवित रख कर तमसो मां ज्योतिर्गमय का संदेश देता है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली में केवल मिट्टी का दीया में तेल डालकर दीपावली मनाते हैं। इससे जहां घर पवित्र होता है जबकि पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं होता है। कीट पतंग भी समाप्त हो जाता है। मिट्टी के दीयों का इस्तेमाल दीपावली के साथ साथ छठ पूजा में भी जमकर होता है।

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