चंडीगढ़ः भारत में पहली बार किसी कोर्ट ने किसी आपराधिक मामले पर राय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक आरोपी की जमानत अर्जी के संबंध में अपनी राय को मान्य करने के लिए चैट जीपीटी का इस्तेमाल किया। यह पहली बार है जब चैटजीपीटी का इस्तेमाल भारत में जमानत अर्जी पर फैसला लेने के लिए किया गया है। जस्टिस अनूप चितकारा के नेतृत्व वाली पीठ दंगा, आपराधिक धमकी, हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में जून 2020 में गिरफ्तार एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने इस मामले में जमानत देने पर दुनिया भर के कानूनी न्यायशास्त्र के बारे में चैटजीपीटी की राय मांगी, जहां आरोपी पर क्रूरता से जुड़े अपराध का आरोप लगाया गया है।

Chat GTP को लेकर क्या बोले जस्टिस?
जस्टिस अनूप चितकारा ने सोमवार (27 मार्च) को अपने आदेश में हालांकि यह स्पष्ट कर दिया कि चैटजीपीटी का कोई भी रेफरेंस और की गई कोई भी टिप्पणी न तो मामले के गुण-दोष पर राय की अभिव्यक्ति है और न ही निचली अदालत इन टिप्पणियों पर ध्यान देगी। उन्होंने कहा यह संदर्भ केवल जमानत न्यायशास्त्र पर एक व्यापक तस्वीर पेश करने का इरादा है, जहां क्रूरता एक कारक है।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ
सुनवाई के दौरान जस्टिस ने चैटजीपीटी से पूछा कि जब हमलावरों ने क्रूरता से हमला किया तो जमानत पर न्यायशास्त्र (Jurisprudence) क्या है? मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, चैटबॉट ने जवाब दिया इन मामलों के लिए जमानत पर मामले की परिस्थितियों और क्षेत्राधिकार के कानूनों और नियमों पर निर्भर करेगा। अगर हमलावरों पर एक हिंसक अपराध का आरोप लगाया गया है, जिसमें क्रूरता शामिल है, जैसे कि हत्या, उग्र हमला, यातना और समुदाय के लिए खतरा तो ऐसे मामलों में जज जमानत देने के लिए कम इच्छुक हो सकता है या जमानत राशि बहुत ज्यादा निर्धारित कर सकता है।
क्या है चैट जीपीटी (Chat GTP)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक तरह का चैट बॉट है। Chat GTP गूगल की तरह ही एक सर्च इंजन है। इसमें मिली जानकारी के अनुसार आप अपने किसी भी तरह के सवाल का जवाब पा सकते हैं। 30 नवंबर 2022 को चैट जीपीटी को लॉन्च किया गया था। यह डेटा को एन्क्रिप्ट करके सुरक्षित रखता है और केवल व्यापार या कानूनी मुद्दों के लिए जानकारी को बरकरार रखता है।