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ऊना जिला में मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना से तीन वर्षों में 85,826 किसान लाभान्वित

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ऊना/सुशील पंडित: हिमाचल प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना किसानों के लिए एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना किसानों को उन्नत, टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज, पौध संरक्षण सामग्री एवं खाद उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभा रही है।

उप निदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन के अनुरूप ऊना जिला में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत विभाग द्वारा निर्धारित दरों पर बीज एवं खाद पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही पेखुबेला स्थित सरकारी फार्म एवं मृदा प्रशिक्षण प्रयोगशाला के लिए भी नियमित बजट का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने जानकारी दी कि बीते तीन वर्षों में 8.78 करोड़ रुपये व्यय कर 85,826 किसानों को योजना से लाभान्वित किया गया है। इनमें वर्ष 2023-24 में 3.19 करोड़ रुपये खर्च कर 15,377, वर्ष 2024-25 में 3.16 करोड़ रुपये खर्च कर 48,646 तथा वर्ष 2025-26 में 2.43 करोड़ रुपये व्यय कर 21,803 किसानों को लाभ पहुंचाया गया है।

मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के मुख्य घटक

मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के अंतर्गत समूह आधारित सब्जी उत्पादन योजना, आदान आधारित उपदान योजना (बीज, पौध संरक्षण सामग्री एवं खाद), बीज गुणन श्रृंखला की सुदृढ़ता और प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण जैसे घटक शामिल हैं।

समूह आधारित सब्जी उत्पादन योजना
प्रदेश में सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए कृषि विभाग द्वारा समूह पद्धति के माध्यम से सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल से न केवल सब्जी फसलों के उत्पादन में वृद्धि हो रही है, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। साथ ही युवा एवं महिला किसानों को कृषि व्यवसाय और लघु उद्योगों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

आदान आधारित उपदान योजना
बीज को कृषि का सबसे महत्वपूर्ण आदान मानते हुए सरकार द्वारा किसानों को अनाज, दाल, तिलहन एवं चारा फसलों के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान, जबकि आलू, अदरक और हल्दी के बीजों पर 25 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मिश्रित खादों पर भी उपदान दिया जा रहा है।
राज्य सरकार ने फसलों के संरक्षण के लिए गैर-रसायनिक उपायों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत कीट ट्रैप, ल्योर, जैव नियंत्रक, जैविक कीटनाशक एवं वानस्पतिक नियंत्रकों पर सभी वर्गों के किसानों को 50 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। बीज गुणन गतिविधियों से प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण
कृषि विभाग द्वारा प्रदेश में 11 मृदा परीक्षण, 3 उर्वरक परीक्षण, 3 बीज परीक्षण, 2 जैव नियंत्रण, 1 राज्य कीटनाशक परीक्षण तथा 1 जैव उर्वरक उत्पादन एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला संचालित की जा रही हैं। किसानों को मृदा स्वास्थ्य आकलन के लिए निःशुल्क मृदा जांच की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। गैर-रसायनिक कीट नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए कांगड़ा और मंडी जिलों में जैव नियंत्रण प्रयोगशालाएं किसानों के खेतों में जैव एजेंट, जैव कीटनाशक, ट्रैप और ल्योर आदि का निःशुल्क प्रदर्शन भी कर रही हैं।

उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि किसानों की समृद्धि में ही जिले और प्रदेश की समृद्धि निहित है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार ऊना जिला में कृषि विभाग किसानों को सरकारी सब्सिडी पर उन्नत किस्म के बीज, खाद और कृषि उपकरण उपलब्ध करवा रहा है। जिला प्रशासन किसानों की सेवा और सुविधा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

 

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