अमृतसरः अटारी-वाघा बॉर्डर पर उस समय भावुक और खुशनुमा माहौल देखने को मिला जब पाकिस्तान से रिहा हुए 7 भारतीय नागरिक अपने वतन वापस लौट आए। लंबे समय के बाद अपनों को सुरक्षित वापस देखकर परिवार वालों की आंखें खुशी से भर आईं। इन नागरिकों को लेने के लिए उनके रिश्तेदार बड़ी संख्या में बॉर्डर पर मौजूद थे। सालों की बेचैनी और इंतजार के बाद जैसे ही इन नागरिकों ने भारतीय सीमा में प्रवेश किया, पूरे माहौल में खुशी और शांति की लहर दौड़ गई।
जानकारी मुताबिक, रिहा हुए 7 भारतीय नागरिकों में से 4 फिरोजपुर जिले के, एक जालंधर, एक लुधियाना और एक उत्तर प्रदेश का है। रिहा हुए नागरिकों ने मीडिया को बताया कि पाकिस्तानी कोर्ट ने उन्हें एक साल जेल की सजा सुनाई थी, लेकिन उन्हें करीब ढाई साल जेल में बिताने पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल भेजने से पहले उनके साथ मारपीट भी की गई। लाहौर की कोट लखपत जेल में दूसरे भारतीय कैदी भी बंद थे और उन्हें बहुत मुश्किल हालात में अपने दिन बिताने पड़े। उन्हें लंबे समय तक बैरक में रखा गया और सीमित सुविधाएं दी गईं।
रिहाई के बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने सभी नागरिकों को अटारी-वाघा बॉर्डर पर BSF को सौंप दिया। इसके बाद, भारत की तरफ से पूरी कस्टम और इमिग्रेशन प्रक्रिया कानूनी तौर पर पूरी की। डिप्टी कमिश्नर अमृतसर के निर्देश के अनुसार, नायब तहसीलदार की ड्यूटी लगाई गई। सभी नागरिकों को एम्बुलेंस से गुरु नानक देव हॉस्पिटल, अमृतसर ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल चेकअप किया गया। इस दौरान पायलट गाड़ी समेत सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
प्रोटोकॉल ऑफिसर अरुण महल ने बताया कि साल 2023 में आई भयानक बाढ़ के दौरान ये सभी नागरिक अपने रिश्तेदारों, जमीन और जानवरों को बचाने के लिए बॉर्डर वाले इलाकों में गए थे। इस दौरान वे अनजाने में बॉर्डर पार कर गए और तेज बहते पानी में तैरकर पाकिस्तान पहुंच गए। बाद में, पाकिस्तान रेंजर्स ने भारतीय BSF से संपर्क करके इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और पाकिस्तानी कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा सुनाई गई।
