शिमलाः हिमाचल प्रदेश में पटवारी कानूनगो ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिसके चलते 4000 से ज्यादा पटवारी कानूनगो आज भी सामूहिक अवकाश पर हैं। वहीं दफ्तरों में दूसरे दिन भी ताले लटके हुए हैं। कल से पटवारी-कानूनगो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। इनकी हड़ताल से हजारों लोग परेशान हैं। खासकर अलग अलग प्रतियोगी परीक्षाएं देने वाले बच्चों को विभिन्न प्रकार से सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहे हैं। काउंसलिंग, एडमिशन और अलग अलग पेपर के लिए हिमाचली बोनोफाइड, इनकम, लैंड-लेस, जाति प्रमाण पत्र, ओबीसी जैसे सर्टिफिकेट की जरूरत होती है। मगर पटवारी-कानूनगो के स्ट्राइक पर जाने से बच्चों को ये सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहे।
इसी तरह राजस्व विभाग के माध्यम से मिलने वाली 39 तरह की सेवाएं बीते 25 फरवरी से ठप पड़ी है। प्रदेश के पटवारी-कानूनगो स्टेट कैडर बनाए जाने पर भड़क उठे है। इन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। हालांकि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने दो दिन पहले इन्हें काम पर लौटने और वार्ता के लिए हर वक्त सरकार के दरवाजे खुले होने की बात कही थी। मगर अब तक सरकार ने इन्हें वार्ता के लिए नहीं बुलाया। हिमाचल पटवारी कानूनगो संयुक्त एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश चौधरी ने बताया कि जब तक उनकी मांगे नहीं मान ली जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। पटवारी-कानूनगो की भर्ती जिला कैडर में हुई है।
अब स्टेट कैडर बना दिया गया। राजस्व विभाग के माध्यम से तरह तरह की ऑनलाइन सेवाएं ली जा रही है। मगर कंप्यूटर इंटरनेट जैसी सुविधाएं नहीं दी जा रही है। राजस्व विभाग के माध्यम से मिलने वाली 39 प्रकार की सेवाएं आज ठप पड़ी है। इनकी हड़ताल से रजिस्ट्री, डिमार्केशन, इंतकाल, तकसीम, गिरदावरी और बैंक की केसीसी रिपोर्ट के अलावा विभिन्न प्रकार के सर्टिफिकेट जैसी सेवाएं नहीं मिल पा रही है। राज्य सरकार ने बीते साल पटवारी-कानूनगो को स्टेट कैडर में डालने का फैसला लिया था। तब भी हिमाचल संयुक्त पटवार एवं कानूनगो संघ ने एक सप्ताह से अधिक समय तक अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी। सरकार के आश्वासन पर इन्होंने अपनी हड़ताल को खत्म किया था।
