नई दिल्लीः मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संघर्ष ने कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसी बीच हालात को संभालने और खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट (समुद्री मार्ग) को सुरक्षित रखने के लिए 35 देशों की एक अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में भारत को भी शामिल होने का निमंत्रण मिला है, जबकि अमेरिका इसमें शामिल नहीं होगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम ने भारत को इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी इस बैठक में वर्चुअली हिस्सा लेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित बनाए रखने पर चर्चा करना है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है।
मिडिल ईस्ट संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब दूसरे महीने में पहुंच चुका है। स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है, जिसके चलते वहां रहने वाले लोगों, खासकर भारतीयों की सुरक्षा चिंता का विषय बन गई है।
6 लाख से ज्यादा भारतीय लौटे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 6 लाख से ज्यादा भारतीय मिडिल ईस्ट से वापस भारत लौट चुके हैं। सुरक्षा हालात को देखते हुए बड़ी संख्या में लोग स्वदेश लौट रहे हैं।
ईरान से भारतीयों की सुरक्षित निकासी
भारत सरकार ने ईरान से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने का बड़ा अभियान शुरू किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि अब तक 1,200 से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया।इनमें 845 छात्र शामिल हैं। इनमें से 996 लोगों को आर्मेनिया भेजा गया। 204 लोगों को अजरबैजान भेजा गया। इन दोनों देशों में भारतीय दूतावासों की मदद से लोगों को सुरक्षित भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है।
छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा
निकाले गए लोगों में छात्रों की संख्या सबसे अधिक है। सीधे ईरान से भारत आने वाली फ्लाइट्स प्रभावित होने के कारण सरकार ने आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते निकासी की योजना बनाई। विदेश मंत्रालय ने इन देशों में अपने मिशनों को सक्रिय किया ताकि भारतीय नागरिकों को तुरंत सहायता मिल सके।
पीएम मोदी की वैश्विक नेताओं से बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार दुनिया के नेताओं से संपर्क में हैं। 28 मार्च को उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान मिडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा हुई। ऊर्जा ढांचे पर हमलों की निंदा की गई। समुद्री मार्ग (शिपिंग लेन) को सुरक्षित और खुला रखने पर जोर दिया गया।
सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए
भारत सरकार सभी मंत्रालयों के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। जरूरत पड़ने पर और भी कदम उठाए जा सकते हैं ताकि विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।