अमृतसर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पटवारियों के बीच चल रहे विवाद विवाद में अब इस्तीफे होने भी शुरू हो गए हैं। जालंधर और अमृतसर के कुल 19 पटवारियों ने इस्तीफा देकर अपनी नौकरी छोड़ने का ऐलान किया है। राजस्व पटवार यूनियन पंजाब के अध्यक्ष हरवीर सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि जालंधर के 17 पटवार सर्कलों और अमृतसर के 2 पटवार सर्कलों के सेवानिवृत्त पटवारियों ने ठेके पर काम करने से मना कर दिया है और अपने इस्तीफे संबंधित अधिकारियों को भेज दिए हैं।
हालांकि जिला जालंधर जिला प्रशासन पटवारियों के नौकरी छोड़ने की बात को सिरे से नकारा है। डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल ने कहा कि जिला प्रशासन को अभी तक किसी भी सेवानिवृत्त पटवारी का इस्तीफा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले जिला प्रशासन द्वारा 59 सेवानिवृत्त पटवारियों को ठेके पर नियुक्त किया गया था।
उन्होंने कहा कि इन पटवारियों के कार्यभार को कम करने और उनकी मदद के लिए प्रशासन ने उनके साथ 80 नए प्रशिक्षु पटवारियों को नियुक्त किया है। सेवानिवृत्त कानूनगो एवं पटवारी वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव मक्खन सिंह मान ने यह भी दावा किया है कि एसोसिएशन के किसी भी सदस्य द्वारा कोई इस्तीफा नहीं दिया गया है और उनकी एसोसिएशन ने इस संबंध में सुबह एक बैठक भी बुलाई है।
बता दें कि जिन पटवारियों के इस्तीफे देने के ऐलान का दावा किया जा रहा है यह वो हैं जो सरकार ने खाली पटवार सर्कल चलाने के लिए रिटायरमेंट के बाद ठेके पर भर्ती किए थे। यूनियन का कहना है कि इन्होंने सरकार के ESMA एक्ट लागू करने फैसले और मुख्यमंत्री द्वारा पटवारियों-कानूनगो को भ्रष्ट कहने के विरोध में नौकरी छोड़ने का ऐलान किया है।
