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हिमाचल प्रदेश के गत्ता उद्योगों में हड़ताल की तैयारी

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समय पर  भुगतान न होने से आई समस्या

 तीन महीने में कागज की कीमतों में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी 

पेपर मिल संचालकों की मनमानी से प्रदेश गत्ता उद्योग को 50  करोड़ के नुकसान का अनुमान

बद्दीसचिन बैंसल: पिछले तीन महीने में कागज की कीमत 30 प्रतिशत तक बढ़ने से हिमाचल प्रदेश  के लगभग 250  गत्ते के डिब्बे बनाने वाले उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। नियमों को ताक पर रखकर पेपर मिल संचालक कागज के दाम में हर महीने इजाफा कर रहे हैं। इससे प्रदेशभर में उद्योगों को 50  करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है। और भुगतान का संकट पैदा हो गया है ! पेपर मिल संचालकों की मनमानी से परेशान गत्ता उद्योग अपने ग्राहकों को माल सप्लाई  नहीं कर पा रहे  है। हिमाचल प्रदेश गत्ता उद्योग संघ ने 1 अक्तूबर को  आपात बैठक बुलाई  गई है।

कोरोगेटेड बॉक्स बनाने वाले उद्योगों में कागज की सप्लाई मुजफ्फरनगर, काशीपुर, मेरठ ,  पंजाब, हरियाणा और हिमाचल से होती है। पेपर मिल संचालकों की गुटबंदी का असर पूरे प्रदेश के उद्योगों पर पड़ रहा है। मिल संचालक पीक सीजन के दौरान दाम बढ़ाने के लिए कागज का झूठा संकट दिखाते हैं और कई-कई दिनों के लिए मिल बंद कर देते हैं।

पिछले तीन महीनों से यह सिलसिला चल रहा है और हर महीने दो से ढाई रुपये प्रति किलोग्राम कागज का दाम बढ़ाया जा रहा है। मिल संचालकों ने फिर से वही हथकंडा अपनाते हुए कागज के दाम बढ़ाने के लए 28 सितंबर से 6 अक्तूबर तक अपनी मिल बंद करने की घोषणा की है। लगातार बढ़ाए जा रहे कागज के दाम से उद्योग चला पाना मुश्किल हो रहा है। और भुगतान का संकट भी पैदा हो गया है ! इस समय उद्योग के पास पेपर का स्टॉक खत्म हो गया है मिल मालिक आर्डर देने के बाद 15 से 20 दिनों में पेपर  की सप्लाई कर रहे है।

बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष हेमराज चौधरी ने कहा कि बीबीएन क्षेत्र में करोगेटेड (गत्ता ) बॉक्स और प्रिंटिंग उद्योगों का हब है बीबीएन में ही 15000 टन कागज की खपत हर महीने होती है सालाना लगभग 700  करोड़ रूपए से ज्यादा का कारोबार यहाँ से होता है ! उत्तर प्रदेश में लगभग 150 पेपर मिल हैं हिमाचल प्रदेश में 6 पेपर मिल है पंजाब और हरियाणा में भी पेपर मिले है जहाँ से हमारी पेपर की आपूर्ति की जाती है।

हिमाचल प्रदेश गत्ता उद्योग संघ  के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेंदर जैन  व बीबीएन के अध्यक्ष हेमराज चौधरी ने बताया कि बाजारों में प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने, व्यापार की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने और कीमतों पर निगरानी के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) गठित है। पेपर मिल संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगाते हुए चार साल पहले आयोग ने कोरोगेटेड बॉक्स निर्माताओं के हक में फैसला सुनाया था। मिल संचालकों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाना था, लेकिन कोविड के कारण दोबारा मनमाने तरीके से दाम न बढ़ाने की चेतावनी देकर मिल संचालकों को छोड़ा गया।

संचालकों ने आयोग में शपथ पत्र भी दाखिल किया था, लेकिन अब फिर से मिल संचालकों ने मनमाने तरीके से कागज के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को इस बिषय में एक कमेटी का गठन कर के पुरे प्रकरण पर जाँच करनी चाहिए !

त्योहारों के सीजन से पहले कोरोगेटेड बॉक्स उद्योगों की बंदी का बाजार और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।  कोई भी उत्पाद बिना बॉक्स के नहीं बिकता। कागज की लगातार बढ़ रही कीमत से बंदी के मुहाने पर खड़े इस कारोबार से प्रत्यक्ष रूप से प्रदेश में जुड़े लगभग 15000 श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।

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