विधानसभा में हंगामा, जयराम और मुकेश के बीच हुई नोक-झोंक….

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शिमला। हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को जनमंच कार्यक्रमों पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर व नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री आमने सामने हुए। प्रश्नकाल के दौरान दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस विधायक नंद लाल के सवाल के जवाब में पंचायती राज व ग्रामीण विकास मंत्री विरेंद्र कंवर ने बताया कि 15 जनवरी 2019 तक प्रदेश में हुए 95 जनमंच कार्यक्रमों में 1 करोड़ 61 लाख 37 हजार 553 रूपये खर्च हुए हैं, जबकि 11 जनमंच कार्यक्रमों की खर्चे की डिटेल आनी अभी बाकी है।

प्रत्येक जनमंच पर 2 लाख खर्च होते हैं। लेकिन लोगों की संख्या बढऩे व दूरदराज के इलाकों में इसका खर्चा और बढ़ जाता है। लेकिन विपक्ष ने यह कहकर आपति जताई कि जनमंच कार्यक्रमों में सरकारी पैसे का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग हो रहा है। कांग्रेस के जगत सिंह नेगी ने पूरक सवाल में कहा कि कई जनमंच कार्यक्रमों में 2 लाख और कई कार्यक्रमों में 4 लाख तक खर्च हो रहा है। इस तरह सरकारी पैसे की बंदरबांट हो रही है और सरकार इसका आडिट करवाए। इस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष जनमंच कार्यक्रमों पर अनावश्यक तौर पर सवाल खड़े कर रहा है।

हमारी सरकार का दायित्व आम जनता की समस्या का निराकरण करना है और जनमंच कार्यक्रमों में गांव-घर द्वार पर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है और इन कार्यक्रमों के आयोजन में होने वाली न्यूनतम आवश्यकतों को पूरा करने के लिए खर्चा होता है। ये कार्यक्रम सुबह 9 बजे से देर शाम तक चलते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा मानवीय दृष्टिकोण से जनमंच में सम्मिलत होने वाले अधिकारियों व आम जनता को भोजन देने की व्यवस्था रहती है तथा विपक्ष को इस पर आपति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन कार्यक्रमों में धन का कतई दुरूपयोग नहीं हो रहा है और बाकायदा इसके आडिट करवाने की भी व्यवस्था है।

वहीं नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने जनमंच कार्यक्रमों के आयोजनों पर यह कहते हुए सवाल खड़े किए कि यह कोई नई योजना नहीं है। पूर्व की सरकार में जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन जनता के द्वार कार्यक्रम हुआ करते थे। जयराम सरकार ने लोगों को गुमराह करने के लिए सिर्फ योजना का नाम बदला है। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में पहली बार जनमंच कार्यक्रम हो रहे हैं और यह प्रशासन जनता के द्वार कार्यक्रम से पूरी तरह भिन्न है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष के लिए ये आयोजन गले की फांस बन गए हैं। इसलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं। प्रशासन जनता के द्वार में किसी तरह का कोई मैकानिज्म था ही नहीं।

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