चुनावी विज्ञापनों की अनुमति लेना आवश्यक: डीसी

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ऊना(रोहित शर्मा):- लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दल व उम्मीदवारों को विज्ञापनों का प्रसारण करने से पहले मीडिया प्रमाणन व निगरानी समिति (एम.सी.एम.सी.) से अनुमति लेना आवश्यक है। जिला निर्वाचन अधिकारी व उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने बताया कि चुनाव से जुड़ा कोई भी संदेश व विज्ञापन समिति की अनुमति के बिना चलाने पर इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लघंन माना जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि समाचार पत्रों में चुनावी विज्ञापन प्रकाशित करने से पहले इसकी स्वीकृति लेना आवश्यक है। उम्मीदवार को केबल टीवी अथवा रेडियो पर प्रसारित होने वाली प्रचार सामग्री की भी अनुमति लेनी होगी। यही नहीं प्रचार से संबंधित कोई भी पोस्टर, बैनर व होर्डिंग भी बिना इजाजत लगाए नहीं जा सकते। मीडिया प्रमाणन व निगरानी समिति से अनुमति प्राप्त करने के बाद ही प्रचार सामग्री प्रकाशित की जा सकती है। राकेश कुमार प्रजापति ने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा भेजे जाने वाले बल्क एस.एम.एस या फिर वॉइस मैसेज की भी निगरानी की जाती है। उम्मीदवार के लिए एस.एम.एस या वॉइस मैसेज की प्री-सर्टिफिकेशन कराना आवश्यक है। जिला लोक संपर्क अधिकारी कार्यालय में मीडिया प्रमाणन व निगरानी समिति बनाई गई है। किसी भी प्रचार सामग्री का प्रसारण करने से तीन दिन पहले समिति के सामने विज्ञापन सामग्री की दो प्रतियां प्रस्तुत करनी होगी।
जिला निर्वाचन अधिकारी राकेश कुमार प्रजापति ने बताया कि इस बार चुनाव में सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर भी चुनाव आयोग ने दिशा-निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया पर विज्ञापनों का प्रसारण करने से पहले, इनकी अनुमति लेना भी आवश्यक है। असत्यापित विज्ञापन, नफरत भरे भाषण व झूठी खबरें पोस्ट करने को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। आयोग ने नामांकन दाखिल करते वक्त उम्मीदवारों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट का विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक बनाया है। चुनाव आयोग फेसबुक, ट्विटर, यू-ट्यूब पर प्रत्याशी की गतिविधियों पर निगरानी रखेगा। सोशल मीडिया पर किए जाने वाले विज्ञापन का खर्च भी उम्मदीवार के चुनावी व्यय में जुड़ेगा।

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