मोदी सरकार फिर दे रही मौका सस्ता सोना खरीदने का मौका…

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नई दिल्ली। सीजन के दौरान सोने में निवेश को शुभ माना जाता है। इसलिए बड़े पैमाने पर भारतीय दुर्गापूजा से लेकर दिवाली तक सोना खरीदते हैं। अगर आप भी सोना खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो मोदी सरकार आपके लिए इस फेस्टिव सीजन में शानदार स्कीम लेकर आई है। दरअसल मोदी सरकार एक बार फिर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 में निवेश का मौका दे रही है। आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश 7 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच कर सकते हैं। मोदी सरकार यह पांचवीं बार आम आदमी के लिए गोल्ड में निवेश की स्कीम लेकर आई है। इस बार सरकार की ओर से गोल्ड बॉन्ड की कीमत 3,788 रुपये प्रति ग्राम की तय की गई है। अगर आप इस गोल्ड बॉन्ड में ऑनलाइन माध्यम से निवेश करते हैं तो इसपर आपको 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट भी मिलेगी।
ऑनलाइन माध्यम से गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने पर निवेशकों के लिए यह दर 3,738 रुपये प्रति ग्राम ही होगी। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘इस अवधि के दौरान निर्गम मूल्य यानी इशू प्राइस 3,738 रुपये प्रति ग्राम होगा। इसकी समापन की तारीख 11 अक्टूबर 2019 रखी गई है। अगर आप गोल्ड बॉन्ड में निवेश करना चाहते हैं तो आप महज 3,738 रुपये से इसकी शुरुआत कर सकते हैं। बता दें, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत मोदी सरकार ने साल 2015 में की थी। इससे पहले सितंबर में जारी गोल्ड बॉन्ड में निवेश के लिए सरकार ने 3,890 रुपये प्र​ति ग्राम रेट तय किया था। लेकिन सोने के भाव में गिरावट की वजह से फिलहाल सरकार ने गोल्ड बॉन्ड के मूल्य में कमी की है। इस गोल्‍ड बॉन्ड की कीमत बाजार में चल रहे रेट से कम होती है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना के गोल्‍ड की कीमत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से तय की जाती है. इस बॉन्ड में न्यूनतम निवेश एक ग्राम है। इसपर टैक्‍स भी छूट मिलती है। इसके अलावा स्‍कीम के जरिए बैंक से लोन भी लिया जा सकता है। इस गोल्‍ड की बिक्री बैंकों, डाकघरों, एनएसई और बीएसई के अलावा स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के जरिए होती है। सरकार इस स्‍कीम के जरिए गोल्‍ड की फिजिकल डिमांड को कम करने की कोशिश में है। बॉन्ड खरीदने के लिए निवेशक डिमांड ड्रॉफ्ट, चेक या ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं।
आरबीआई भारत सरकार की तरफ से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करता है. इस बॉन्ड में निवेश एक ग्राम के गुणकों में किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक व्यक्ति के लिए एक साल में 500 ग्राम है. वहीं हिन्दू संयुक्त परिवार एक साल के दौरान अधिकतम 4 किलोग्राम सोने की कीमत के बराबर तक का बॉन्ड खरीद सकते हैं। ट्रस्ट और वित्तीय वर्ष के समान इकाइयों के मामले में निवेश की ऊपरी सीमा 20 किलोग्राम है। जैसे ही सोने की कीमतों में इजाफा होता है, वैसे ही गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को इसका फायदा मिलता है। ये बॉन्‍ड पेपर और इलेक्‍ट्रॉनिक फॉर्मेट में होते हैं। जिससे आपको फिजिकल गोल्‍ड की तरह लॉकर में रखने का खर्च भी नहीं उठाना पड़ता।
बॉन्‍ड पर सालाना कम से कम ढाई फीसदी का रिटर्न मिलेगा. गोल्ड बॉन्ड में किसी तरह की धोखाधड़ी और अशुद्धता की संभावना नहीं होती है। ये बॉन्ड्स 8 साल के बाद मैच्योर होंगे। मतलब साफ है कि 8 साल के बाद भुनाकर इससे पैसा निकाला जा सकता है। गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत नवंबर 2015 में हुई थी। इसका मकसद भौतिक रूप से सोने की मांग में कमी लाना और सोने की खरीद में उपयोग होने घरेलू बचत का इस्तेमाल वित्तीय बचत में करना है।

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