हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने राज्य स्तरीय बैठक में सरकार के समक्ष रखीं 15 मांगे

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ऊना (पवन ठाकुर)। हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर यूनियन की एक विशेष बैठक 18 अगस्त को हमीरपुर में प्रदेश अध्यक्ष राजेश पराशर की अध्यक्षता में हुई जिसमें प्रदेश महासचिव रमेश कमल व सभी जिलों के अध्यक्ष व अधिक मात्रा में निजी बस ऑपरेटरों ने शिरकत की जिसमें  जिला निजी बस ऑपरेटर  कांगड़ा से हैप्पी अवस्थी  चंबा से रवि महाजन हमीरपुर से  नरेश दर्जी बिलासपुर से राजेश पटियाल  सोलन से  जॉनी मेहता नालागढ़ से मनोज राणा सिरमौर से मामराज शर्मा कुल्लू से रजत रामपुर से मनीष व हमीरपुर से विजय ठाकुर राजकुमार आरटीसी भारत भूषण विरेंद्र ठाकुर कांगड़ा से संदीप वालिया अखिल सूट विनय बेदी कुशल चड्ढा ऊना से संजीव कुमार सुखदेव सिंह पंकज दत्ता थे सभी बस ऑपरेटरों 4 घंटे लंबी बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा करके सरकार से मांग की है
 (1)  प्रदेशभर में जे एन एन आर यू एम की सभी 791 बस से बिना परमिट समय सारणी के अंतर राज्य व अंतर जिला लंबी दूरी के परमिट पर नाजायज चल रही हैं जबकि उच्च न्यायालय शिमला के केस नंबर-: CWP 331,332/16 व 1727/17 के आदेश के मुताबिक यह उपरोक्त बस से केवल मात्र केंद्र द्वारा मंजूर 13 कलस्टर  में ही चलनी चाहिए और क्लस्ट्रर मैं भी परमिट स्वीकृत होने पर ही चलनी चाहिए l
(2)  हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एक अधिसूचना 07-07-2009 को मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट 1972 की धारा 14 (3) के तहत जे एन एन आर यू एम बसों का स्पेशल रोड टैक्स और टोकन टैक्स माफ कर दिया गया था परंतु यह बसें जनवरी 2015 में आई और परिवहन विभाग में 07-07- 2009 की अधिसूचना के मुताबिक इन बसों का भी स्पेशल रोड टैक्स और टोकन टैक्स माफ कर दिया जबकि यह बसें विश्व 15 से लेकर आज दिन तक प्रदेश के अंदर निजी बस ऑपरेटरों के साथ बराबर प्रतिस्पर्धा में चलती आ रही हैं यह कैसा निर्णय है कि एक ही रूट पर निजी बस जा रही है वह सरकार को टोकन टैक्स और स्पेशल रोड टैक्स दे रही है और सरकार द्वारा स्वीकृत परमिट और समय सारणी के मुताबिक बस को चला रहा है परंतु जे एन एन आर यू एम ई बस हमारी निजी बसों के बराबर बिना परमिट से चल रही है और यात्रियों से किराया भी हमारी बसों के बराबर ले रही है परंतु किराए में टैक्स की राशि शामिल होने के बावजूद भी इन बसों से विभाग द्वारा किस आधार पर स्पेशल टैक्स की वसूली नहीं की गई प्रदेश के निजी बस ऑपरेटरों की मांग है डी जे एन एन आर यू मैन की बसों से जनवरी 2015 से लेकर आज दिन तक स्पेशल रोड टैक्स और टोल टैक्स की वसूली की जाए
(3) हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा सन 2008 से लेकर आज दिन तक स्पेशल रोड टैक्स अदा नहीं किया है और निजी बस ऑपरेटर समय-समय पर टैक्स अदा करते हैं परंतु कुछ एक हमारे निजी बस ऑपरेटर कि नहीं कारणों से टैक्स अदायगी में देरी करते हैं तो विभाग उन बसों की पासिंग परमिशन परमिट का नवीनीकरण नए बस की खरीद पर रोक लगा दी जाती है परंतु उसके विपरीत हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा हजारों करोड़ पर टैक्स के बकाया होने पर भी इन बसों की पासिंग परमिशन पुराने परमिट का नवीनीकरण नई बसों की खरीद पर रोक नहीं लगाई जाती जबकि प्रदेश के अंदर हिमाचल पथ परिवहन निगम और निजी बस ऑपरेटर मोटर व्हीकल एक्ट व हिमाचल प्रदेश मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट के दायरे में एक समान हैं परंतु परिवहन विभाग कानूनी कार्रवाई केवल मात्र निजी बस ऑपरेटरों पर लागू करते हैं हम कानून और नियम के तहत ही अपनी बसों का संचालन करने के लिए सरकार से सहयोग करते हैं परंतु हिमाचल पथ परिवहन निगम को विभाग कभी भी कानून के दायरे में रहकर काम नहीं करता और हमारे साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है हमारी सरकार से मांग है कि जब हिमाचल पथ परिवहन निगम अपने परमिट पर चलकर यात्रियों से किराया वसूलते है और उस किराया में टैक्स की राशि भी शामिल है फिर किस आधार पर यह अपने स्पेशल रोड टैक्स की अदायगी नहीं करती है हमारी सरकार से मांग है की सरकार हिमाचल पथ परिवहन से जब तक स्पेशल रोड टैक्स की वसूली नहीं कर लेती है तब तक हिमाचल पथ परिवहन निगम के बसों की पासिंग पुराने परमिट का नवीनीकरण नई बसों की खरीद पर रोक लगाई जाए और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता नजर आए
(4) प्रदेश के अंदर निजी बस ऑपरेटरों के परमिट व स्पेशल रोड टैक्स ऑनलाइन कर दिए गए हैं तो हिमाचल पथ परिवहन निगम के परमिट और स्पेशल रोड टैक्स को क्यों ऑनलाइन नहीं किया जा रहा है हिमाचल पथ परिवहन निगम अपने सभी कृत पंखों से ज्यादा बस से प्रदेश के विभिन्न मार्गों पर चला रहा है परमिट के आधार पर हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसें दूरी कम बनती है जबकि वास्तविकता मैं हिमाचल पथ परिवहन निगम काजो रिकॉर्ड दैनिक ड्यूटी चार्ट हर डीपू में तैयार किया जाता है उसके हिसाब से यह बस से बहुत अधिक दूरी तय करती है और यात्रियों से उसी प्रकार किराया वसूलते हैं किराए के साथ टैक्स की राशि भी जुड़ी होती है और यह सरकार को टैक्स अदा नहीं करते प्रदेश के निजी बस ऑपरेटरों की मांग है कि सन 2008 से लेकर आज दिन तक हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा तैयार दैनिक ड्यूटी चार्ट के मुताबिक बसों द्वारा प्रदेश के अंदर कितनी दूरी तय की गई उसी के हिसाब से इन बसों से स्पेशल रोड टैक्स वसूला जाए और हमारे साथ सौतेला व्यवहार ना किया जाए हिमाचल पथ परिवहन निगम के परमिट और स्पेशल रोड टैक्स के रिकॉर्ड की पारदर्शिता नजर आनी चाहिए पूरी छानबीन की जाए तो हजारों करोड़ों रुपए का गड़बड़ घोटाला सामने आ जाएगा सरकार से प्रार्थना है कि तत्काल इस विषय में कार्रवाई अमल में लाई जाए अन्यथा प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर इस मामले को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय शिमला में मामला दायर करके कार्रवाई की मांग करेंगे
(5) परिवहन विभाग द्वारा इस समय निजी बस ऑपरेटरों के बसों सहित परमिट ट्रांसफर पर बिना किसी कारण से रोक लगा दी गई है जोकि बिल्कुल गलत प्रक्रिया है प्रदेश के अंदर करीब 200 निजी बस ऑपरेटरों ने बस सहित परमिट ट्रांसफर की फाइलें संबंधित आरटीओ कार्यालय में जमा करवा दी हैं और करीब 200 के करीब निजी बस ऑपरेटरों ने और अतिरिक्त बसें खरीदी और बेची हैं जिन्हें बसों सहित परमिट ट्रांसफर की फाइलें तैयार तो कर ले ही हैं परंतु संबंधित आरटीओ कार्यालय में इन निजी बस ऑपरेटरों की फाइलें जमा नहीं की जा रही हैं हमारी आपसे प्रार्थना है कि सभी फाइलों को जमा करके जैसे पूर्व में बस सहित परमिट ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही थी उसे पुनः बहाल किया जाए
(6) परिवहन विभाग द्वारा कुछ दिन पहले प्रदेश में निजी बस ऑपरेटरों को स्पेशल परमिट केवल मात्र उनके परमिट की समय सारणी के बाद जारी किए जाने शुरू हुए हैं जो कि एक बिल्कुल गलत प्रक्रिया है प्रदेश के अंदर विवाह शादी स्पेशल पार्टी और धार्मिक मेलों में निजी बस ऑपरेटर स्पेशल परमिट लेकर अपनी बसों को चलाते थे और प्रदेश के अंदर अधिकांश निजी बस ऑपरेटर मंदे की हालात से गुजर रहे हैं और वह ऑपरेटर अपनी बसों को इन धार्मिक मेलों और विवाह शादियों में चला कर अपने टैक्स व फाइनेंस की किस्त पूरी करते हैं और बड़ी कठिनाई के साथ अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं हमारी आपसे प्रार्थना है कि जैसे पूर्व में स्पेशल परमिट जारी किए जाते थे वैसे ही भविष्य में भी स्पेशल परमिट जारी किए जाने चाहिए
(7) जब निजी बस ऑपरेटरों के स्पेशल रोड टैक्स व परमिट को ऑनलाइन कर दिया गया है तो निजी बस ऑपरेटरों की मांग है कि हमें स्पेशल परमिट व परमिट नवीन करण की प्रक्रिया ऑनलाइन करके हमें यह परमिट ऑनलाइन ही जारी किए जाने चाहिए जिससे विभाग को काम करने में आसानी होगी और निजी बस ऑपरेटर भी घर बैठे अपना काम करवा पाने में सक्षम होगा ऐसी प्रक्रिया अमल में लाई जाए
(8) प्रदेश के अंदर सभी आरटीओ को यह आदेश करने की अनुकंपा करें कि जब भी कार्यालय में समय सारणी की बैठक हो तो उस बैठक का वीडियो ग्राफी कराना अनिवार्य हो वह इसलिए है कि जब समय सारणी की बैठक होती है तो उसमें प्रभावशाली बड़े निजी बस ऑपरेटर छोटे निजी बस ऑपरेटरों पर दबाव डालकर अपनी समय सारणी को अपनी इच्छा के मुताबिक अपनी बसों के अंतराल को बढ़ाकर तैयार करवा लेते हैं और वह अधिक फायदा समय सारणी के माध्यम से लेने में कामयाब हो जाते हैं अगर कोई छोटा निजी बस ऑपरेटर अपनी बात रखता है तो उसे रोग के साथ दबा दिया जाता है और बैठक के दौरान बड़ी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है जब बैठक की वीडियोग्राफी होगी तो हर निजी बस ऑपरेटर को यह डर होगा कि हमने कोई गलत बात कही और गलत तरीके से फायदा उठाने की कोशिश की तो सारी कार्रवाई वीडियोग्राफी में रिकॉर्ड होगी और उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है ऐसी प्रक्रिया से समय सारणी की बैठकों में पारदर्शिता नजर आएगी और समय सारणी की अपना भी खत्म हो जाएंगी
(9) हमारी परिवहन विभाग और सरकार से मांग है कि भारतवर्ष में जहां-जहां स्पेशल रोड टैक्स बसों पर लगाया गया है वहां पर बसों से अतिरिक्त टोकन टैक्स नहीं वसूला जाता है हमारा प्रार्थना है कि बस ऑपरेटर ऑपरेटरों को साधारण प्रक्रिया से टैक्स वसूली की प्रक्रिया तैयार की जाए सिंगल विंडो टैक्स लगाया जाए बस के ऊपर पंजाब प्रदेश की तरह बस रजिस्ट्रेशन फीस के बाद एक ही टैक्स स्पेशल रोड टैक्स वसूला जाता है हमारी आपसे प्रार्थना है कि हमारे प्रदेश में भी उसी मुताबिक टेक्स की प्रणाली लागू की जाए जिससे बस ऑपरेटर को भी अपने टैक्स का हिसाब रखने में आसानी होगी और साथ साथ ही परिवहन विभाग को भी निजी बस ऑपरेटर और हिमाचल पथ परिवहन की बसों का टैक्स का हिसाब रखने के लिए आसानी होगी हमारे प्रदेश में ग्रीन टैक्स टोकन टैक्स स्पेशल रोड टैक्स और सेस लगा हुआ है इतनी प्रकार के टैक्स नहीं वसूले जाने चाहिए पंजाब की तर्ज पर एक किस्म का टैक्स स्पेशल रोड टैक्स दिया जाए जिससे सभी को राहत मिलेगी l
(10) हिमाचल प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा जितनी जे एन एन आर यू एम की बस से व वोल्वो बसें चल रही हैं उन सभी के दरवाजे फोल्डिंग है और अन्य राज्यों से आने वाली प्राइवेट बस से सीटीयू की बसें पंजाब रोडवेज हरियाणा रोडवेज पेप्सू रोडवेज व अन्य की जितनी भी स्टेज कैरिज से हिमाचल प्रदेश में आती हैं वह सारी फोल्डिंग दरवाजे वाली होते हैं परंतु हिमाचल प्रदेश में रजिस्टर होने वाली निजी बसों को फोल्डिंग दरवाजा रखना मना है हमें यह कहा जाता है कि प्रदेश में फोल्डिंग दरवाजे से यात्रियों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है हम आपकी बात मानने के लिए तैयार हैं परंतु दो तरह के नियम लागू होने से हमें ठेस पहुंच रही है या तो सरकार पूर्ण प्रतिबंध लगाए कि हिमाचल प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में बाहर से आने वाली बसें भी फोल्डिंग दरवाजे वाली नहीं होनी चाहिए या हमें भी फोल्डिंग दरवाजा रखने की अनुमति प्रदान की जाए प्रदेश में एक जैसा कानून लागू किया जाना चाहिए
(11)  परिवहन विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए इनकी स्टेज कैरिज परमिट के ऊपर 7 वर्ष से अधिक की बस को दर्ज नहीं किया जाएगा परंतु अगर कोई बस ऑपरेटर उस बस को 20 साल भी चलाएं तो कोई फर्क नहीं पड़ता इसलिए यह नियम मैं बहुत बड़ी खामी पाई जा रही है ऐसा नहीं होना चाहिए प्रदेश में निजी बसें प्रतिदिन बहुत कम दूरी तय करती हैं इन की अपेक्षा हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस से अधिक दूरी तय करती हैं बहुत से निजी बस ऑपरेटर ऐसे हैं जिनकी बसों के रूट ढाई सौ से 300 किलोमीटर के हैं वह अपने बस की इससे पूरी करने के बाद उस परमिट पर नई बस चलाना चाहते हैं परंतु बैंक की किस्तें बड़ी मुश्किल के साथ-साथ बस में खत्म होती हैं जब बस कर्ज से मुक्त होती है तो निजी ऑपरेटर उसको भेज कर उसके स्थान पर नई बस चलाना चाहता है परंतु परिवहन विभाग के आदेशों के अनुसार 7 वर्ष से अधिक की बस किसी भी पद पर दर्ज नहीं की जा रही जिस कारण वह अपनी बस को पीट पाने में असमर्थ हो जाता है और चाहने के बावजूद भी उस परमिट पर नई बस सेवा नहीं उपलब्ध कराता और मजबूरी में उसी बस को और अधिक समय तक चलाता रहता है प्रदेश में बहुत से निजी बस ऑपरेटर ऐसे हैं जिनकी बसें 150 किलोमीटर के करीब चलती हैं और उनकी आमदन मात्र हजार पे के आस पास रहती है ऐसे छोटे रोड पर यह छोटा बस ऑपरेटर 30 लाख की नई बस सेवा नहीं दे सकता क्योंकि वह बैंक किक्कर जी की किस आधार नहीं कर पाएगा ऐसे में वह 78 साल पुरानी बस लेकर अपने रूट पर बस कुछ लाकर अपनी रोजी-रोटी चलाता है अब 7 साल से अधिक की बस परमिट पर चढ़ेगी नहीं और वह खरीद नहीं पाएगा ना ही पुरानी बस भी करेगी और ना ही कोई नई बस्ती पाएगा इस कारण सारी स्थिति बिगड़ती जा रही है हमारी परिवहन विभाग से प्रार्थना है कि 15 वर्ष तक की पुरानी बस को परमिट पर दर्ज करने की अनुमति प्रदान की जाए ताकि छोटे बड़े सभी बस ऑपरेटर अपनी बसों को बेचकर उनके स्थान पर अच्छी बस सेवा जनता को दे पाए यह मांग पूरे प्रदेश के निजी बस ऑपरेटरों की है
(12)  हिमाचल प्रदेश के विभिन्न आरटीओ कार्यालय में सभी कृति के मुताबिक स्टाफ की बहुत अधिक कमी है जिस कारण आरटीओ कार्यालय में ऑपरेटरों के नियमित काम समय पर नहीं हो पा रहे जिससे प्रदेश के ऑपरेटरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है आप से निवेदन है कि प्रदेश के सभी आरटीओ कार्यालयों में उसकी जरूरत के मुताबिक जो स्वीकृत पद हैं उन्हें तत्काल प्रभाव से भरा जाए ताकि प्रदेश के ऑपरेटरों का काम सही समय पर किया जा सके l
(13) प्रदेश के अंदर एक कमेटी का गठन किया जाए जिसमें निजी बस ऑपरेटरों की भी भागीदारी सुनिश्चित हो और वह कमेटी यह तय करें कि किस-किस से मार्ग पर कितनी अतिरिक्त बसें चलाई जा सकती हैं जिससे पूर्व में चलने वाले ऑपरेटरों को नुकसान ना पहुंचे और जनता को बस सेवा मिले और सुनिश्चित किया जाए कि इस मार्ग पर कितनी अतिरिक्त बसों में कितनी हिमाचल पथ परिवहन की बसें चलाई जाएगी और कितनी निजी क्षेत्र की बसें चलाई जाएगी ऐसा ना हो किसी मार्ग पर जरूरत से ज्यादा बसें उपलब्ध करा दी जाए या जरूरत से कम जिससे उस रूट पर बसों का अधिक प्रेशर हो जाए और जो काफी लंबे समय से निजी बस ऑपरेटर बस सुविधा दे रहे हैं वह भी फेल हो जाए इस बात को जरूर सुनिश्चित किया जाए इसके आधार पर नए परमिट जारी किए जाएं
(14) प्रदेश के सभी बस अड्डों के अंदर निजी बस ऑपरेटरों को व उनके स्टाफ के लिए कमरे मुहैया कराए जाएं l
(15)  सड़क सुरक्षा बोर्ड और बस स्टैंड मैनेजमेंट कमिटी में भी निजी बस ऑपरेटरों को सदस्य बनाया जाए ताकि वह अपने पक्ष की बात रख सकें वहां पर केवल मात्र हिमाचल पथ परिवहन के अधिकारियों को ही बिठाया जाता है जबकि प्रदेश के विभिन्न बस अड्डों पर सबसे अधिक बस अड्डा पर्ची हिमाचल प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर देते हैं परंतु उन्हें बस अड्डों पर मिलने वाली कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं होती है सुनिश्चित किया जाए कि हिमाचल पथ परिवहन निगम की तरह हर बस स्टैंड पर निजी बस ऑपरेटरों को भी बराबर की सुविधा उपलब्ध की जाए l

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