प्रदेश के अंदर माल वाहनों द्वारा यात्रियों को ले जाने पर लगे पूर्ण प्रतिबंध : राजेश पराशर 

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ऊना (पवन ठाकुर)। हिमाचल प्रदेश निजी बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष राजेश पाराशर ,महासचिव रमेश कमल,  जिला निजी बस ऑपरेटर यूनियन कांगड़ा के अध्यक्ष हैप्पी अवस्थी ,जिला बिलासपुर के अध्यक्ष राजेश पटियाल ,हमीरपुर से नरेश दर्जी ,चंबा से  रवि महाजन, सिरमौर से मामराज शर्मा ने पुलिस द्वारा बसों  के ओवरलोडिंग के चालान करने के उपरांत निजी बसों के परमिट रद्द करने बारे संबंधित आरटीओ कार्यालय को पत्र भेजे हैं उन पर कड़ा संज्ञान लिया है और उसका विरोध करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में माल वाहनो में यात्रियों को भारी मात्रा में बिठाकर विभिन्न धार्मिक स्थानों पर लाया ले जाया जा रहा है जिनमें ट्रैक्टर ट्राली ,खुली जीप , टेंपो ट्रक शामिल हैं परंतु पुलिस ऐसे वाहनों पर कोई शिकंजा नहीं कस रही है ।हिमाचल पुलिस केवल मात्र ऐसे वाहनों को चालान करके छोड़ देती है जब वहां के स्थानीय निजी बस ऑपरेटर इस प्रक्रिया का विरोध करते हैं तो पुलिस अधिकारियों का यह कहना होता है कि एक ट्रक में 150 से 200 लोग होते हैं हम ऐसे वाहनों को जब्त नहीं कर सकते ।इसका मतलब यह हो गया के बस में केवल मात्र हमारा  ड्राइवर और कंडक्टर दो लोग होते हैं जिस कारण निजी बसों का जिस मर्जी तरीके से उत्पीड़न किया जाए क्या वह जायज है। प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि मैं प्रशासन और पुलिस विभाग से पूछना चाहता हूं कि एक ट्रक में जब 100 से अधिक यात्री सफर कर रहे हों तो क्या उस ट्रक का ₹1000 का चालान काटने के बाद उस ट्रक में सफर कर रहे यात्रियों का जीवन सुरक्षित हो जाता है जबकि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के केस नंबर 176/5 मेरे साफ-साफ आदेश किए गए हैं कि प्रदेश के अंदर माल वाहनों में यात्रियों को लाने ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगे और हिमाचल पुलिस कानून को सख्ती से लागू करे । परंतु हिमाचल प्रदेश पुलिस को हाईकोर्ट के आदेशों की कोई भी परवाह नहीं है। प्रदेशाध्यक्ष राजेश राजू ने कहा कि हम प्रदेश की पुलिस से आग्रह करेंगे कि तत्काल प्रभाव से उच्च न्यायालय शिमला के आदेशों की पालना की जाए व माल वाहनों में यात्रियों को लाने ले जाने पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने कहा कि हमारे इस प्रेस को जारी वक्तव्य के बाद कोई भी घटना माल वाहनों में यात्री लाने- ले जाने के दौरान होती है तो उसकी सारी जिम्मेवारी प्रशासन और पुलिस की होगी और मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष कोर्ट के आदेशों की अवमानना के तहत मुकदमा दायर किया जाएगा।

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