आया FaceApp का फेक वर्जन, भूलकर भी न करें इंस्टाल…

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नई दिल्ली। फेसचेंजिंग रशियन ऐप फेसऐप (FaceApp) इन दिनों दुनिया भर में वायरल हो रहा है। साथ ही इस ऐप की प्रिवेसी पॉलिसी पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। अब इन दिनों इंटरनेट पर एक फेसऐप का फेक वर्जन आ गया है जो यूजर्स को ट्रिक करके उनकी डिवाइस को मालवेयर से इंफेक्ट कर रहा है। इस फेक ऐप को यूजर्स सर्टिफाइड फेसऐप समझ रहे हैं और इसे इंस्टाल कर रहे हैं। दरअसल यह एक मैलवेयर है जो यूजर्स की डिवाइस को इंफेक्ट कर रहा है।

(मैलवेयर को दी फेसऐप की शक्ल)

रिपोर्ट के मुताबिक साइबर सिक्यॉरिटी कंपनी Kaspersky Labs ने यह पाया है कि ‘MobiDash’ नाम के ऐडवेयर के इस्तेमाल से इस मैलवेयर को फेसऐप की शक्ल दी गई है। जिससे यूजर इसे असली फेसऐप समझ बैठते हैं।

(इन दिनों वायरल है फेसऐप)

पिछले कुछ दिनों से फेसऐप सोशल मीडिया पर वायरल है। दुनिया भर के लोग अपने बुढ़ापे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। फेसऐप को लेकर आई इस तरह की खबरों से यूजर्स को अपनी प्रिवेसी की चिंता होने लगी है। वहीं दूसरी तरफ कुछ इंटरनेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रिवेसी के मामले में फेसऐप इस वक्त मौजूद दूसरे ऐप्स के जैसा ही है।

फ्रेंच सिक्यॉरिटी रिसर्चर एलियॉट ऐंडरसन ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘यूजर फेसऐप के अस्पष्ट नियम पर शर्तों पर नाराज हो रहे हैं लेकिन फोन में इंस्टॉल्ड अधिकतर ऐप ऐसे ही नियम और शर्तों के साथ आते हैं। अगर यूजर इन्हें एक बार पढ़ लेंगे तो उन ऐप्स को तुरंत अनइंस्टॉल कर देंगे। उदाहरण के तौर इसकी शुरुआत स्नैपचैट से की जा सकती है।’

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