मामला जालन्धर सिविल अस्पताल का…

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क्या ये इन्साफ है मरीजों के साथ? …

डाक्टरों का कहना-पहले भरो फाईल फिर होगा इलाज…

जालन्धर कैंट (गुलाटी)। जालंधर सिविल अस्पताल में पहुंचे मरीज की हालत चाहे कितनी भी नाजुक क्यों न हो जब तक फाईल नहीं बनती तब तक डाक्टर साहिब इलाज शुरू नहीं करते है। जी हां, ऐसा ही मामला जालंधर के सिविल अस्पताल में तब देखने को मिला जब शाहकोट से सड़क हादसे में घायल लड़की को लेकर उसके परिवार वाले 108 नंबर से सिविल अस्पताल में पहुंचे। लड़की का परिवार करीब आधा घंटे तक इधर-उधर भटकते रहे लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई यहां तक कि घायल लड़की के परिवार वालों ने डाक्टर को यह भी कहा कि फाईल बनाने के लिए लड़की गई हुई है

आप इलाज तो शुरू करवाएं, लेकिन डाक्टर एक ही रट लगाए हुए पहले फाईल आने दो फिर देखते है। इस तरह का मामला देख जब एक पत्रकार ने डाक्टर साहिब से कहा कि लड़की के खून बहा रहा आप इलाज तो शुरु करे तो उसको बैड पर लिटा दिया गया जब कुछ समय बाद फाईल आई तो डाक्टर ने उसको टरोमा वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन वहां पर लड़की बेचारी घायल अवस्था में बैड पर पड़ी रही लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। करीब आधे घंटे बाद उस घायल का इलाज शुरू किया। ऐसे में मरीजों की सुविधा देने का दावा करने वाले सिविल अस्पताल के सभी दावें ऐसे मामलों को देख कर खोखले साबित होते दिखाई देते है।

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